बुधवार, 20 सितंबर 2023

मत्स्यासन (Fish Pose) - क्रिया और उपयोग Matsyasana (Fish Pose) – Actions and Uses

 मत्स्यासन (Fish Pose) - क्रिया और उपयोग
Matsyasana (Fish Pose) – Actions and Uses



 

मत्स्यासन, जिसे हम फिश पोज के रूप में भी जानते हैं, योग का एक महत्वपूर्ण आसन है जो हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने में मदद कर सकता है। यह आसन आपके पीठ, कंधों, गर्दन, और चेहरे की मांसपेशियों को मजबूत करने के साथ-साथ, श्वासनली और मानसिक स्थिरता को भी बेहतर बना सकता है। यह योगासन विशेष रूप से बैठे हुए काम करने वाले लोगों के लिए उपयोगी होता है, जिनका दिन भर काम करके पीठ और कंधों पर दबाव होता है।
 
कैसे करें मत्स्यासन:सबसे पहले, एक योग आसन की तरह पड़ें और पायें को एक-दूसरे के पास लाकर रखें।
अपने हाथों को अपने नीचे की ओर पालट लें और पालम नीचे की ओर रखें।
अब, अपने हाथों का समर्थन लेते हुए, अपनी पीठ को ढाल करें ताकि आपके ऊपर का शरीर केवल सिर्फ हड्डियों पर लेटा रहे।
अपने सिर को पिछवाड़े की ओर टिपटिपिए और आँखें बंद करें। यह सांस लेते समय आपकी गर्दन को आराम देगा।
धीरे-धीरे सांस छोड़ें और अपने पेट को बाहर करें, जिससे आपकी पीठ उच्च उठेगी और यह आपको मत्स्य के आकार का देगा।

इस स्थिति में 15-30 सेकंड तक बने रहें, फिर धीरे-धीरे लौटें।
आराम से सांस लें और अपनी पीठ को धीरे-धीरे नीचे करें।

मत्स्यासन के उपयोग:
पीठ और कंधों की मजबूती: मत्स्यासन के प्रयास करने से पीठ और कंधों की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं, जिससे सही रूप से बैठकर काम करने में मदद मिलती है।
गर्दन के दर्द का निवारण: मत्स्यासन गर्दन के दर्द को कम कर सकता है और गर्दन की सांस को सुधार सकता है।
चेहरे की सुंदरता: इस आसन से चेहरे की त्वचा को योगिक तरीके से खिलाकर उसकी सुंदरता में सुधार हो सकता है।
श्वासनली: मत्स्यासन श्वासनली को सुधारने में मदद कर सकता है और आपके सांस लेने की क्षमता को बढ़ा सकता है।
थायरॉइड ग्लैंड को प्रोत्साहित करता है: यह आसन थायरॉइड ग्लैंड को प्रोत्साहित करता है, जो थायरॉइड कार्य के लिए फायदेमंद हो सकता है।
सावधानियां:       
मत्स्यासन को करते समय ध्यान दें
मत्स्यासन (Fish Pose) को करते समय निम्नलिखित सावधानियों का पालन करें:
शीघ्रता से आरंभ करें: यदि आप पहले से योग करने वाले नहीं हैं, तो मत्स्यासन को धीरे-धीरे आरंभ करें और अधिक समय तक आसन को बनाए रखने का प्रयास न करें।
गर्दन की सावधानी: मत्स्यासन के दौरान गर्दन को अत्यधिक टिपटिपाने वाली नहीं करना चाहिए। यह गर्दन में दर्द या दिक्कत का कारण बन सकता है।
बच्चों और गर्भवती महिलाएं: मत्स्यासन को बच्चों और गर्भवती महिलाओं को करने से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना सुनिश्चित करें।
हृदय और उच्च रक्तचाप: हृदय रोग या उच्च रक्तचाप के रोगियों को इस आसन को करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि मत्स्यासन के दौरान शरीर की दबाव स्तर में वृद्धि हो सकती है।
ध्यानपूर्वक सांस लें: आसन को करते समय ध्यानपूर्वक सांस लें और आसन के बाद भी ध्यानपूर्वक सांस छोड़ें।
सांस को सावधानी से छोड़ें: आसन को करते समय और छोड़ते समय यदि कोई चक्कर आए या असुविधा हो, तो आसन को तुरंत छोड़ दें और आराम करें।
सहायक: यदि आपको मत्स्यासन करते समय सहायक की आवश्यकता हो, तो सहायक का साथ लें ताकि आप स्थिर और सुरक्षित रूप से आसन कर सकें।
दर्द या असुविधा की स्थिति में रूचिकर: यदि किसी बार मत्स्यासन करते समय दर्द या असुविधा होती है, तो आसन को तुरंत छोड़ दें और चिकित्सक से परामर्श लें।
योग आसनों को सुरक्षितीकृत करने के लिए हमेशा ध्यानपूर्वक और सावधानी से करें, और यदि आपको किसी प्रकार की चिंता होती है, तो डॉक्टर से परामर्श करें।
मत्स्यासन (Fish Pose) का जन्म
मत्स्यासन योग का एक महत्वपूर्ण आसन है जो हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने में मदद करता है। इसका नाम संस्कृत शब्द "मत्स्य" से आया है, जिसका अर्थ होता है "मछली" और "आसन" का अर्थ होता है "पोज" या "स्थिति"। इसे फिश पोज भी कहा जाता है क्योंकि इस आसन का आकार एक मछली के धर्माकर्षण में से लिया गया है।
मत्स्यासन के नामी योगियों के बारे में कहा जाता है कि वे इस आसन को पहले करने वाले थे और इसे प्रथम योग गुरु भगवान पतंजलि ने योग शास्त्र के ग्रंथ में दर्ज किया। इस आसन का महत्वपूर्ण स्थान हिन्दू धर्म और योग के प्रचारक स्वामी विवेकानंद के द्वारा प्रमोट किया गया था।
मत्स्यासन का प्राथमिक उद्देश्य शारीरिक तौर पर पीठ, कंधों, गर्दन, और चेहरे की मांसपेशियों को मजबूत करना है। यह आसन सीधे कमरे के क्षेत्र में दबाव को कम करने में मदद करता है और सही पोस्चर को बनाए रखने में सहायक होता है। इसके अलावा, इस आसन का नियमित अभ्यास करने से गर्दन की सांस को सुधार सकता है, चेहरे की त्वचा को ताजगी और निखार देने में मदद कर सकता है, श्वासनली को सुधार सकता है, और स्त्रेस को कम करने में मदद कर सकता है।
इस आसन को करते समय ध्यान और सावधानी से करना चाहिए, और अगर आपने पहले कभी योग नहीं किया है तो पहले किसी योग गुरु की मार्गदर्शन में आसन को करें। साथ ही, किसी चिकित्सक से सलाह लें यदि आपको किसी खास स्वास्थ्य समस्या का सामना है जो इस आसन को करने से पहले ध्यान में रखनी चाहिए।

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